सवाल ये नही है की हो क्या रहा है, सवाल ये है की मैं क्या बोलूं, बुरा बोला तो कोई और फ़ायदा उठाएगा, भला बोलना जेहन को पसंद नही है. कभी रेल,कभी खेल, कभी जेल कोई भी जगह नही बचा जहाँ इन्होने गंदगी नही फैलाई. कोई कहता है तुम भी चोर थे इसलिए मई भी हूँ, और हमर चौथे पाए ने तो तहलका मच्चा रखा है..मैं आम आदमी हूँ
No comments:
Post a Comment