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जातिगत आरक्षण -
बर्ण व्यवस्था के अधर पर आरक्षण निति का निर्माण हुआ।जिसका मुख्य उदेश्य था पिछड़े लोगों के समाज के मुख्य धारा में लाना। हमारे यहाँ पिछड़ापन का आधार कभी भी वर्ण नहीं रहा है, जैसे की कुछ राजघराने अर्थात चन्द्रगुप्त , अशोक , पाल वंश, चालुक्य इसमें से कोई भी शासक आज के कथित उच्य वर्ग के नहीं है।आप सबोने कहानिओं में सुना होगा। एक गरीब ब्राह्मण।आरक्षण तब भी माली हालत के आधार पे मिलनी चाहिए थी और आज भी।सहायता को अधिकार के रूप में बदल देने पे उत्कर्ष हर समय कमजोर होगा।आरक्षण का इस्तेमाल आजतक में किसी भी परगति के लिए होने के बजाय वोट बैंक को बढाने ये बदलने में किया जाता है।निति के आधार पर और बिरोध की संभावनाओ के आधार पर ये निति 10 साल के लिए लाई गयी।पर 70 साल से जब ये निति सही नहीं साबित हो रही है फिर भी हमारे सलमान खुर्सिद जैसे नेता आरक्षण की आबोहवा को गर्म रखे रहते हैं।
बेशर्मी
जातिगत आरक्षण -
बर्ण व्यवस्था के अधर पर आरक्षण निति का निर्माण हुआ।जिसका मुख्य उदेश्य था पिछड़े लोगों के समाज के मुख्य धारा में लाना। हमारे यहाँ पिछड़ापन का आधार कभी भी वर्ण नहीं रहा है, जैसे की कुछ राजघराने अर्थात चन्द्रगुप्त , अशोक , पाल वंश, चालुक्य इसमें से कोई भी शासक आज के कथित उच्य वर्ग के नहीं है।आप सबोने कहानिओं में सुना होगा। एक गरीब ब्राह्मण।आरक्षण तब भी माली हालत के आधार पे मिलनी चाहिए थी और आज भी।सहायता को अधिकार के रूप में बदल देने पे उत्कर्ष हर समय कमजोर होगा।आरक्षण का इस्तेमाल आजतक में किसी भी परगति के लिए होने के बजाय वोट बैंक को बढाने ये बदलने में किया जाता है।निति के आधार पर और बिरोध की संभावनाओ के आधार पर ये निति 10 साल के लिए लाई गयी।पर 70 साल से जब ये निति सही नहीं साबित हो रही है फिर भी हमारे सलमान खुर्सिद जैसे नेता आरक्षण की आबोहवा को गर्म रखे रहते हैं।
बेशर्मी