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June 7, 2011

BABA Ramdev

बाबा रामदेव -क्रांति की एक ब्यथा कथा....

                                                     जब से सदी की सुरुआत में २ अंक का उदय हुआ है विश्व मंच पर दो बाते हर तरफ देखने को मिल रही है, एक तो परिवर्तन जिसने दुनिया के हर कोने में सदियों से चली आ रही सत्ता  को जड़  से उखार फेकने हेतु आंधी का कम किया.कई शासक बदल दिए गए और कईओं की हालत बौनी  बनकर रह गयी.लोगो के झुण्ड को जन सैलाब कहा जाने लगा, और दूसरा परिवर्तन लोगो की सोच में आने लगा.विश्व का हर भाग एक दुसरे के लिए मार्ग दर्शक सा परतीत हो रहा है.
                                                         भारतीय जनतंत्र में शादियों से उलझे जन के लिए भी यह मौका बिलकुल उचित सा दिखने लगा जब देश में तरीके के रस्ते में सब से बड़ा मुद्दा भ्रष्टाचार का उठा. लाख लिख के घोटाले अब लाख कडोदो में होने लगे.राष्ट्रीय अस्तर पर सरकार के कुछ मंत्रियो का काम घोटाले करना और बचे हुए लोगो का कम उस घोटाले के ऊपर राजनैतिक बयाँ बजी करना ही रह गया.प्रधानमंत्री कमजोर कहे जाने लगे.कुछ लोगो ने तो उन्हें रिमोट कण्ट्रोल सिस्टम की उपाधि दे डाली.घोटाले और महंगाई की मर झेल रही सरकार को सामने खरा बिपक्छ का दौ भी कारगर नहीं दिख रहा था..पछताई बिल्ली की तरह कुछ लोगो ने बिदेश में पड़े काले धन का जीकर कर के सरकार को असमंजश की इस्स्थिति में ला दिया.
                                                                                 मिला जुला कर क्रांति और बदलाव को हवा देने का इस से अच्छा बना बनाया मंच नहीं मिल सकता था.पहले कदम के रूप में अन्ना हजारे का अनशन सरकार के लिए अदद परेशां का कारन बना ही था .ऊपर से हल ही में बाबा राम देव के तरफ से उठाया सत्याग्रह शर्कर के बजूद के लिए खतरा बन गया और इस सत्याग्रह को रोकने के लिए सरकार ने जो कदम उठाया उसे कांग्रेस की जन्मजात आदत ही कहा जा सकता है.इस्सके रोकने की हर पध्हती दमन के नाम से इतिहास  में शुमार है.

February 2, 2011

इक बार मोहब्बत करने को दिल रहता है बेचैन सदा,

इक बार मोहब्बत करने को दिल रहता है बेचैन सदा,
 पानी की बूंद को एक प्याषा क्या करे समुन्दर से आशा.
   चाहत है फिर भी लानत है क्यों नहीं है मिलती शोख परी.
      कुछ तेरा भी तो हो जाता, चलती जादू की एक छड़ी.
दिखने में अच्छा खाशा हूँ, मेरे आईने से देखो ,
 जब हाथ बाल पे चलता है,कैसा लगता हूँ मत पूछो,.
सरमाता हूँ  इठलाता हूँ,पर मर्द भाऊ ही ख़ता हूँ,
गिरबान  की छेद सदा हाथ से ढकता जाता हु.
वो देखेंगी बस मुझको ही sharamaengi   कुछ अलग तरह
ये सोच लिए ही मर जाऊ पर नहीं कभी कुछ पाता हूँ.

उन में सब कुछ है मै कुछ भी नहीं,
ये वो भी कहती है अक्सर,
जरुरत जिसको वही झुकता है,
खुद को झुकता ही पाता हूँ.
ख्वाइश थी कोई वैसी मिले जिसको सब कुछ मै दे डालू,
गर बचा नहीं कुछ देने को कुछ छंद ही उन्हें सुना डालू.

अब उम्र हुई कुछ शर्म करो, कब तक पीछे से भागोगे,
कुछ लोग भाग ye कहते है, उनको कैसे मै समझाऊ.
जब किया बोहनी धोखा,दोबार किया फिर भी धोखा,
तीसरी कुछ दिन ठहरी थी,चौथी को मैंने ही रोका,
तुम मत आ मेरी माँ ,मैंने बरत  लिया हनुमान का है,
अब बिना तुम्हारे  जी लूँगा,मेरी भी कुछ अभिमान सी है.
जायदा होगा कबिता है न ,,मै उस्सी से कम चलाऊंगा.
चूल्हे में जा के मार जाओ, न संग तुम्हारे आऊंगा.
पर चूल्हे का क्या वो उनका है मेरी ये बात न मानेगा
 जब जब वो उसमे तरपेंगी,मेरी होगी बस एक अदा
इक बार मोहब्बत करने को दिल रहता है बेचैन सदा,
 पानी की बूंद को एक प्याषा क्या करे समुन्दर से आशा.