बाबा रामदेव -क्रांति की एक ब्यथा कथा....
जब से सदी की सुरुआत में २ अंक का उदय हुआ है विश्व मंच पर दो बाते हर तरफ देखने को मिल रही है, एक तो परिवर्तन जिसने दुनिया के हर कोने में सदियों से चली आ रही सत्ता को जड़ से उखार फेकने हेतु आंधी का कम किया.कई शासक बदल दिए गए और कईओं की हालत बौनी बनकर रह गयी.लोगो के झुण्ड को जन सैलाब कहा जाने लगा, और दूसरा परिवर्तन लोगो की सोच में आने लगा.विश्व का हर भाग एक दुसरे के लिए मार्ग दर्शक सा परतीत हो रहा है.
भारतीय जनतंत्र में शादियों से उलझे जन के लिए भी यह मौका बिलकुल उचित सा दिखने लगा जब देश में तरीके के रस्ते में सब से बड़ा मुद्दा भ्रष्टाचार का उठा. लाख लिख के घोटाले अब लाख कडोदो में होने लगे.राष्ट्रीय अस्तर पर सरकार के कुछ मंत्रियो का काम घोटाले करना और बचे हुए लोगो का कम उस घोटाले के ऊपर राजनैतिक बयाँ बजी करना ही रह गया.प्रधानमंत्री कमजोर कहे जाने लगे.कुछ लोगो ने तो उन्हें रिमोट कण्ट्रोल सिस्टम की उपाधि दे डाली.घोटाले और महंगाई की मर झेल रही सरकार को सामने खरा बिपक्छ का दौ भी कारगर नहीं दिख रहा था..पछताई बिल्ली की तरह कुछ लोगो ने बिदेश में पड़े काले धन का जीकर कर के सरकार को असमंजश की इस्स्थिति में ला दिया.
मिला जुला कर क्रांति और बदलाव को हवा देने का इस से अच्छा बना बनाया मंच नहीं मिल सकता था.पहले कदम के रूप में अन्ना हजारे का अनशन सरकार के लिए अदद परेशां का कारन बना ही था .ऊपर से हल ही में बाबा राम देव के तरफ से उठाया सत्याग्रह शर्कर के बजूद के लिए खतरा बन गया और इस सत्याग्रह को रोकने के लिए सरकार ने जो कदम उठाया उसे कांग्रेस की जन्मजात आदत ही कहा जा सकता है.इस्सके रोकने की हर पध्हती दमन के नाम से इतिहास में शुमार है.