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May 29, 2013

आज मैं पटना मे अपने एक सफ़र के दौरान ऑटो मे एक महिला के साथ बैठने का ज़िल्लत उठाया. जब वो ऑटो से उतर रही थी उनके साड़ी का एक छोर ऑटो मे फस गया. मैं एक अच्छे नागरिक का फर्ज़ निभाते हुए उनके उस साड़ी काछोर ऑटो के चंगुल से आज़ाद करने लगा जिसके के कारण साड़ी का वो भाग बिल्कुल फट सा गया और आख़िर साड़ी आज़ाद हो गयी.
- बदले में उस सम्मानित महिला ने मुझे समाज के अच्छे अच्छे गालियों से नबाजा . अभी भी मुझमे समाज सेवा का विचार बचा हुआ है.
उनकी ये शिकायत है की हम कुछ नहीं कहते ,
                                सुनते हैं दो कान में तेल डाल  के।
अल्फाज मेरे मुझको एतराज है तुमसे ,
                    कब तक जुबान से दर्द को कहते रहोगे तुम।
कुछ बोल ऐसा दोस्त मेरे हो जाये इन्कलाब 
                    मिल के जो फिर से निकले तू हो देश की आवाज।
सम्पूर्ण क्रांति का असर आज भी समाज झेल रहा है, मुलायम, लालू जैसे लोग इस ब्यथा कथा के पात्र है, अन्ना की कोशिस  सही थी,पर समाज का कौन सा वर्ग उसे जान पाया ये भी एक मायने रखता है। शायद वो एक ऐसे वर्ग के क्रांति की कहानी थी जो या तो समाचार चॅनेल्स  को रोज देख पा  रहे थे या फिर फ़ेसबुक  या किसी अन्य सोशियल  साईट से जुड़े थे। अमूमन ये भी माना जा सकता है की ये एक क्रांति की कहानी थी। पर सम्पूर्ण क्रांति में भी भारतीय इतिहास अपने को ठगा महसूस कर रहा था और इस क्रांति में भी।क्रांति के सिपाही न्यूज़  रूम के प्रबक्ता  बन गए, और अंततः राजनीति  को ही रास्ता समझा।मेरे बिचार से इसे बदले की क्रांति समझी जाए .क्यूँकि  लोगो ने चमक देखि पर बूंद धरती तक नहीं पहुंची। देश अभी क्रांति चाहता है, मानुस त्रस्त  हैं, पर अरबिंद जैसे नए नबेले पर बिश्वास नहीं कर पा रहे है।मेरे बिचार से इस क्रांति में ऐसे लोग जुरे जो कही से भी राजनैतिक उधेष  को दिख न पाए . अर्थात आम लोग की भागेदारी।। 
त़ड़के शाम सरबजीत सिंह की मौत हो गयी. सरकार ने फिर से गहरी चिंता भी दिखाई विपक्छ को नया मुद्दा भी मिल गया. ये बातें भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहे बातचीत पर भी असर डालेगा जो की लगातार ४० साल से चला आ रहा है. पाकिस्तान ने कई बार इस बातचीत मे ख़टाश भी डाला. ये बातचीत का दौर विश्व रिकार्ड बनाने बाला है.. मैं एक आम आदमी नही समझ पा रहा हूँ की ये बातचीत कैसे होती है जो ४० साल तक चले. मेरे ताउजी के साथ का बिबाद आख़िर ५ बरसों की लड़ाई के बाद कल ख्तम हो गया.
सवाल ये नही है की हो क्या रहा है, सवाल ये है की मैं क्या बोलूं, बुरा बोला तो कोई और फ़ायदा उठाएगा, भला बोलना जेहन को पसंद नही है. कभी रेल,कभी खेल, कभी जेल कोई भी जगह नही बचा जहाँ इन्होने गंदगी नही फैलाई. कोई कहता है तुम भी चोर थे इसलिए मई भी हूँ, और हमर चौथे पाए ने तो तहलका मच्चा रखा है..मैं आम आदमी हूँ
मैं फिर परेशान हूँ. पिछले चुनाव मे नेता जी आए थे. उन्होने जनता से खूब वादा किया था. पर ५ साल मे उसे पूरा नही कर सके.इस बार भी आए हैं, वादा भी कर रहे हैं, पूरी जनता को विश्वाश है की इस बार भी झूठा वादा कर रहे हैं. इसे भी पूरा नही करेंगे. मेरे स्वर्गीय पिता जी और दादा जी के साथ भी इन नेताओं ने ऐसा ही किया था. इस लिए आज तक मैं वैसे ही गौव मे हूँ जैसे गौव मे पैदा हुआ था. आख़िर ये कब तक चलेगा .मेरा गौव कब बदलेगा. मैं आम जनता हूँ.
आइये खुद में जरा अब रूबरू हो लें ,
                             मरने के बाद चैन से बातें करेंगे हम।
मै  नहीं दूंगा कभी अपना बतन  उनको ,
                      चाहे भले ही हर जनम आते रहेंगे हम।
                                               BALLOVE  BADSHAH

मनुष्य पहले बंदर था. या मछली या कीड़ा या .... फिर मेहनत की . आग खोजा, लोहा खोजा, चक्का खोजा, घर बनाया, खेती की. पढ़ते रहें................................................................................................................ आज मनुष्य आदमी हो गय.परिवर्तन के बाद सबसे जुमला परिवर्तन क्या रहा. मनुष्यों ने पहले मनुष्य को बनाया, कोई रिक्सा बाला बना, कोई, धोबी बना, कोई वेश्या बनी, कोई पंडित बना, कोई राजा बना, कोई नेता बना, कोई फ़ेसबुक का मलिक बना, कोई मेंबर बना, कोई फ़ौजी बना. इन सब को नचाने के लिए एक पत्र बना. जिसपे हर देश के किसी अकल्मंद ( जो पहले लिखे तबकों को बनाने का मुख्य अभ्युक्त था) का फोटो लगा हुआ है. इसे पैसे कहते हैं. जो निर्धारित करता है की लाखों साल की तरक्की के बाद का ये इंसान किस का गुलाम है.
ह्वाएँ कुछ बदली सी चल रही हैं, प्रचंड गर्मी है, फिर भी लोग परिवर्तन यात्रा वहाँ करने जा रहे हैं जहाँ ना उनका तथाकथित वोट बॅंक है ना ही वहाँ की आबोहवा परिवर्तन चाहती है, आज तक के इतिहास मे किसी हमले मे कोई नेता मारा गया हो ये असामान्य बात है, नेता और गुण्डों के साठगाँठ को ही तो व्यापक और संभली हुई राजनीति कहते हैं, बयंत सिंह मारे गये , और इंद्रा गाँधी मे सिखों ने नुकसान भुगता, आज कॉंग्रेस के कारण कोई और बलि बेदी को तैयार है, तुर्रा ये है की राजनीति मे शायद अब गुंडाओं की ज़रूरत महसूस नही हो रही है, बातचीत का एक और दौर चलेगा, ६० से ज़्यादा जवानो की सहादत के बाद ये नही हुआ था,कॉंग्रेस फिर कह रही है की ये रमण सरकार की ग़लती है, अगर ये सही है तो राजनीति मे अब खून ख़राबे के ६० की दसक की कहानीशायद फिर शुरू हो फिर भी ह्मे क्या मतलब हम तो आम आदमी हैं बस चाहत यही है की इस गॅंग वॉर मे कुछ राजनीति मे सुधता आ जाए.
मैं कोई नौकरी करूँ, कोई छोटा मोटा बिज़्नेस करूँ, ठेला चलाऊं, बर्तन साफ करूँ और तुम सा.. अनपढ़ ग्वार अरबों का घोटाला करो, हमारे ही टॅक्स का, हमें खाने को २ पैसा नहीं है तुम्हे हग्ने के लिए ४० लाख का हग भवन चाहिए,तुम लुटो और हम इज़्ज़त बचाएँ, क्या करें हम आम जनता हैं, हल्का ले रहा है का बे, आज के बाद मैं भी तेरी जमात मे शामिल देखतें हैं कौन कितना लूट सकता है. कोई व्यक्ति अगर मेरे लूट दल मे समिल हिना चाहें जो आम आदमी हों संपर्क करें.
आदरनीय  दामिनी जी,
                 
                      और आप जैसी तमाम माँ बहनों से मैं फिर से एक बार माफ़ी मांगता हूँ। एक बार फिर से हमें भारतीय होने पर सरम महशूश हो रहा है।जो न ही आपके इज्जत को बचा सकते हैं न ही जिन्दगी।मुझे भारतीय मर्द के रूप में एक हिजड़ा आईने में दीखता है।इस बार भी मैंने जंतर मंतर पर कसम खायी।और इस बार भी भूल जाऊंगा।मेरे गिरे हुए नैतिकता पे इतिहास मुझे कभी माफ़ नहीं करेगा आप से भी यही आशा है।

                                                                           आपका पुनः दोषी
                                                             बल्लव बादशाह (एक आम नागरिक )
बोलूँगा तो बोलोगे कि बोलता है !
नक्सली हमले में मारे गये कॉंग्रेसियों के लिये खूब आँसू बहाये गये , नक्सल विचारधारा को उतना ही गरियाया भी गया , नक्सलियों को नेस्तनाबूद करने के लिये नये नये उपाय बताये गये और तो और आदिवासियों के सबसे खूंखार दुश्मन महेन्द्र कर्मा को महामानव तक कहा गया !
जब भी मैं टी वी खोलता था तो आश्चर्य के साथ साथ हँसी भी आती थी कि कैसे कैसे उटपटांग तर्क दिये जाते थे , नक्सलियों के खिलाफ में और महेन्द्र कर्मा के पक्ष में !
नक्सलियों के इस कार्रवाई को हिंसा और प्रतिहिंसा के बीच गड्डमड्ड नहीं किया जा सकता , उनकी कार्रवाई का विरोध अपनी गंदी राजनीति को चमकाने के लिये भले किया जा सकता है !
जिस तरह बिहार में रणवीर सेना प्रमुख ब्रह्मेश्वर मुखिया था , उनसे भी खुखार महेन्द्र कर्मा का पूरा गिरोह था , जिसे खुले तौर पर सत्ता का संरक्षण प्राप्त था !
नक्सलियों ने सही किया या गलत इसे टी वी पर देख कर या किसी नेता के कहने के आधार पर तय ना करें , जमीनी हकीकत समझें , फिर कोई फैसला करें !
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Like ·  ·  · 23 hours ago
  • Sanjeet Raj and 2 others like this.
  • Shashi Sagar कॉमरेड आज खुद पर जब लात पड़ी है तो सब नेतबन बिलबिला गया है. कारण तलाशने के बजाय कुतर्क कर रहे हैं.
    23 hours ago · Like · 2
  • Brajendra Singh Dosto mana ja sakta hai ki karma khud bara nakshli tha! lekin iss se nakshliyon ko clean nahi mana ja skta hai. nakshali jal jameen aur jangal ki baat aadivashiyon k favour me karte hai, lekin yah ekdan sahi hai ki aaj lagbhag sabhi mines se we log easooli karte hai. Now a days nakshal activity is a sours of huge INCOME for high levelnakshali's. ye paise le k vote girwate hai aur paise lekar vote dalne se rokte v hai.
    19 hours ago · Like · 1
  • Sushil Gautam gundai ke badle gundai, khoon ke badle khoon, ye khel aadivaasiyon kaa kattaee naheen hai,
  • Ballove Badshah बात बेतुकी भी हो सकती है..आप किस आधार पे बारह्मेश्वर मुखिया और कर्मा के वारे मे तुलना कर रहे हैं,,बारह्मेश्वर मुखिया क्या थे इस बारे मे पटना के दोस्तों से राय लीजिए जो उनके मौत पे हुए पटना की इस्थिति को बता देगा..लेबी के पैसे से एयैयशी करना नक्शल बिचारधारा नही है..और आप का ख़ूले शब्दों से मैं विरोध करते हुए कहता हूँ की असेंब्ली मे बम फेकने वाला हर सख्स भगत सिंह और राजगुरु नही कहलाएगा, अफ़ज़ल गुरु और राजगुरु आपको एक ही लगते हैं,? अगर नक्स्ल दलित और सोसितों के आवाज़ है तो शोषण और अत्याचार को पेटेंट इसी जातियों ने नही करबया है,ये शोषण किसी जाती के साथ हो सकता है और अगर माओ की भी नीति अच्छी है, तो रणबीर सेना की क्यूँ नही. तथा कथित उपरी तबका जिसको आप लोगों की कलम कभी कभी सामंती राज भी बुलाती है ने आँखे खोल दी और बदले की भाबना उबाल गयी तो किसी संगठन की ज़रूरत नही पदेगि. लिखते लिखते भाव बिभोर ना हो जाएँ,नक्स्ल ने कॉंग्रेस को मारा, कॉंग्रेस अब नक्स्ल को मारे तो क्या दिक्कत है, बंदूक के बदले फूल गाँधी का कलेजा अब ब्रह्मा ने बनाना छ्चोड़ दिया.
    2 hours ago · Like · 1
  • Nidhi Loyla ballove jee aap ranbir sena samrthak hai ?
  • Ballove Badshah आप ग़लत नही बोल रही हैं, यहाँ हिंदुओं की बात करने बाला भगवा कहलाता है, आप राम नौमी मे अगर दोस्तों को शुभकामनाएँ भी दे तो आप भाजपा समर्थक हैं, भले ही ईद मे सारे नेताओं को गोल टोपी पहने देखिए वो समाजबादी हो गये,नक्शल की जिसने बात की वो कार्ल मार्क्स हो गये और जिसने रणबीर सेना की बात की वो फिर सामंती और समर्थक हो गये, मैं सब से अल्ग एक पार्टी बना लू, जिसका नाम ही रख दू विपक्षी पार्टी.
    2 hours ago · Like · 1