उनकी ये शिकायत है की हम कुछ नहीं कहते ,
सुनते हैं दो कान में तेल डाल के।
सुनते हैं दो कान में तेल डाल के।
अल्फाज मेरे मुझको एतराज है तुमसे ,
कब तक जुबान से दर्द को कहते रहोगे तुम।
कुछ बोल ऐसा दोस्त मेरे हो जाये इन्कलाब
मिल के जो फिर से निकले तू हो देश की आवाज।
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