आज मैं पटना मे अपने एक सफ़र के दौरान ऑटो मे एक महिला के साथ बैठने का ज़िल्लत उठाया. जब वो ऑटो से उतर रही थी उनके साड़ी का एक छोर ऑटो मे फस गया. मैं एक अच्छे नागरिक का फर्ज़ निभाते हुए उनके उस साड़ी काछोर ऑटो के चंगुल से आज़ाद करने लगा जिसके के कारण साड़ी का वो भाग बिल्कुल फट सा गया और आख़िर साड़ी आज़ाद हो गयी.
- बदले में उस सम्मानित महिला ने मुझे समाज के अच्छे अच्छे गालियों से नबाजा . अभी भी मुझमे समाज सेवा का विचार बचा हुआ है.
- बदले में उस सम्मानित महिला ने मुझे समाज के अच्छे अच्छे गालियों से नबाजा . अभी भी मुझमे समाज सेवा का विचार बचा हुआ है.
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