आदरनीय दामिनी जी,
और आप जैसी तमाम माँ बहनों से मैं फिर से एक बार माफ़ी मांगता हूँ। एक बार फिर से हमें भारतीय होने पर सरम महशूश हो रहा है।जो न ही आपके इज्जत को बचा सकते हैं न ही जिन्दगी।मुझे भारतीय मर्द के रूप में एक हिजड़ा आईने में दीखता है।इस बार भी मैंने जंतर मंतर पर कसम खायी।और इस बार भी भूल जाऊंगा।मेरे गिरे हुए नैतिकता पे इतिहास मुझे कभी माफ़ नहीं करेगा आप से भी यही आशा है।
आपका पुनः दोषी
बल्लव बादशाह (एक आम नागरिक )
और आप जैसी तमाम माँ बहनों से मैं फिर से एक बार माफ़ी मांगता हूँ। एक बार फिर से हमें भारतीय होने पर सरम महशूश हो रहा है।जो न ही आपके इज्जत को बचा सकते हैं न ही जिन्दगी।मुझे भारतीय मर्द के रूप में एक हिजड़ा आईने में दीखता है।इस बार भी मैंने जंतर मंतर पर कसम खायी।और इस बार भी भूल जाऊंगा।मेरे गिरे हुए नैतिकता पे इतिहास मुझे कभी माफ़ नहीं करेगा आप से भी यही आशा है।
आपका पुनः दोषी
बल्लव बादशाह (एक आम नागरिक )
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