सम्पूर्ण क्रांति का असर आज भी समाज झेल रहा है, मुलायम, लालू जैसे लोग इस ब्यथा कथा के पात्र है, अन्ना की कोशिस सही थी,पर समाज का कौन सा वर्ग उसे जान पाया ये भी एक मायने रखता है। शायद वो एक ऐसे वर्ग के क्रांति की कहानी थी जो या तो समाचार चॅनेल्स को रोज देख पा रहे थे या फिर फ़ेसबुक या किसी अन्य सोशियल साईट से जुड़े थे। अमूमन ये भी माना जा सकता है की ये एक क्रांति की कहानी थी। पर सम्पूर्ण क्रांति में भी भारतीय इतिहास अपने को ठगा महसूस कर रहा था और इस क्रांति में भी।क्रांति के सिपाही न्यूज़ रूम के प्रबक्ता बन गए, और अंततः राजनीति को ही रास्ता समझा।मेरे बिचार से इसे बदले की क्रांति समझी जाए .क्यूँकि लोगो ने चमक देखि पर बूंद धरती तक नहीं पहुंची। देश अभी क्रांति चाहता है, मानुस त्रस्त हैं, पर अरबिंद जैसे नए नबेले पर बिश्वास नहीं कर पा रहे है।मेरे बिचार से इस क्रांति में ऐसे लोग जुरे जो कही से भी राजनैतिक उधेष को दिख न पाए . अर्थात आम लोग की भागेदारी।।
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