कुछ एतिहासिक भवन जो हमारे स्मारक हैं,
राष्ट्रपति भवन -Raisina Hill के नाम से जाना जाने बाला ये भवन 1929 में अंग्रेज यांत्रिक Lutyens के द्वारा बनबाया गया था।रायसीना और मल्चा गाँव को नस्तोनाबुत करके अंग्रेजों ने इससे बनबाया था। भारत की स्वतंत्रता के 65 साल बाद जब हमारे राष्ट्रपति दुसरे के बनाए छत के निचे रहते हों तो गरीबों को छत कहा से देंगे।गाँधी जी नहीं रहे नहीं तो मै पूछता की असहयोग आन्दोलन में अंग्रेजों के सामान का उपयोग न करने का मतलब कही ये तो नहीं था की ये सामान उसके जाने के बाद उपयोग होगा?
राष्ट्रपति भवन -Raisina Hill के नाम से जाना जाने बाला ये भवन 1929 में अंग्रेज यांत्रिक Lutyens के द्वारा बनबाया गया था।रायसीना और मल्चा गाँव को नस्तोनाबुत करके अंग्रेजों ने इससे बनबाया था। भारत की स्वतंत्रता के 65 साल बाद जब हमारे राष्ट्रपति दुसरे के बनाए छत के निचे रहते हों तो गरीबों को छत कहा से देंगे।गाँधी जी नहीं रहे नहीं तो मै पूछता की असहयोग आन्दोलन में अंग्रेजों के सामान का उपयोग न करने का मतलब कही ये तो नहीं था की ये सामान उसके जाने के बाद उपयोग होगा?
संसद भवन - इस भवन का निर्माण भी Lutyens के ही देख रेख में हुआ, और इसका उद्घाटन Lord Irwin ने 1927 में किया था।ये भवन तथाकथित कदाब्बरो के अनुशार भारतीय लोकतंत्र का मंदिर है, सोचने की बात ये है की 1920-1930 अंग्रेजों को तो ये समझ में आ ही रहा होगा की उनका पैर उखरने लगा है, जैसा की हमारी एतहासिक किताबें बताती है!!फिर वो ऐसे भवनों का निर्माण क्यूँ कराए जा रहे थे!!!
इंडिया गेट - 1931 में lutyens के ही दुआर बनाया गया था जो की एक सहीद स्थल है उन 90000 सहिदों का जो सिपाही थे अंग्रेजों के झंडे को बुलंद करने के लिए British Indian Army . आज हमारा स्वतंत्रता दिवस वही मनाया जाता है और उसी के निचे हमारे शहीदों का स्मारक है। शहीदों की बिधवा के नाम पे कड़ोरो के जमीं घोटाले करते हो शहीदों के नाम पर कुछ अलग से जमीं नहीं दे सकते।
70 साल में इन्होने ऐसी कोई भी रचना नहीं की जिसको ये सीना चौला करके दिखा सके।रचना की है तो अपने खानदानी नामांकरण की , नेहरु शौचालय , इंद्रा estadium , संजय चिरियांघर,....
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