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October 26, 2012

इतिहास के कुछ तथ्य जिन पर हम बेसरमी से नाज करते हैं।

1947 - आजाद भारत- कुछ जानकारों का मानना  है की ये हमारी 200 साल की अथक लड़ाई का प्रयास था। पर इसे सही तौर पे अंग्रेजों की मज़बूरी के तौर पे देखा जाना चाहिए। दुसरे विश्वयुद्ध के बाद ऐसे भी अंग्रेजों की हालत कही उपनिबेस चलाने  की नहीं थी।एक लम्बी लड़ाई का मतलब यही होता है की दुश्मन या तो ताकतवर है या हम खुद कमजोर हैं। अपने अनुसार हम मतलब निकाल  सकते हैं इस आजादी की लड़ाई का। इसे बेहतरीन व्यवसायिक निति के तहद भारतियों के सामने पड़ोसा  गया।जितनी संघर्ष हमारे आलाओं  ने खुद में किया उससे कम ही संघर्ष अंग्रजों के साथ किया गया।ठीकेदारी प्रथा के तहद भारत का ठिका बिदेशी कंपनी के हाथ से छीन कर देशी कंपनी के हाथ में डाल  दी गयी।कानून बनाया गया,वो भी भारितियों के जीवनयापन को ध्यान में न रख कर। सारे एक्ट ,पुलिस पेंनेल , रेल अधिनियम अभी तक अंग्रेजों की ही कॉपी हैं।।विशेष बातें तर्क में निकले तो अच्छा है।नहीं तो प्रबुद्ध त्र्क्शस्त्रिओन को मेरी ये बातें नहीं पचेंगी।
1948- भारत पाकिस्तान समझौता-   मुहम्मद बिन तुगलक इतिहास में पागल बादशाह के नाम से जाना जाता है।कुछ बुधिजिबिओं ने मुस्लिम के लिए अलग देश और हिन्दुओं के लिए अलग देश के निर्माण का संकल्प लिया।निजी स्वार्थ और सत्ता की चाहत में ये इतने गिर चुके थे इन्हें लाखों लोगों के जान की परबाह  तक नहीं रही।इतिहास गवाह था की ऐसा हो ही नहीं सकता था, और तो और ये तुगलक के भी बाप निकले पुरबी और पश्चिमी पाकिस्तान के बिच ये रास्ता भी देने को तैयार थे।नतीजा आजतक हम अपने पड़ोस में एक भाई को दुमन बना बैठे।32 साल से दोनों सरकारे कश्मीर के मुद्दे पे बात केर रही है और इस मुद्दे पे इतना पैसा बहा चुकी है की उतने पैसे में राजश्थान को कश्मीर बना दिया जाए।जर्मनी का मिलन हम सब जानते हैं क्या एक भी कोशिस  है हमारे तरफ से ऐसे मिलन का .हमारा इतिहास या रिश्ता जर्मनी के आपसी मतभेद के मुकाबले बहुत कम है।।  जारी रहे।।।।।।
 ताशकंद समझौता -
                         इतिहास  में पहली बार किसी विजय देश ने समझौता के तहद जीती हुई तो छोरिए अपनी जमीन  किसी हारे  हुए देश को दे देता है और बॉर्डर मैदानी इलाका छोड़ कर ऐसे घाटी  के इलाके को बना दिया जाता है जो कभी भी सुरक्षा के नजर से सही नहीं हो सकता।समझौता के सबसे बड़े सबूत माननिये श्व शाश्त्री जी का रहस्मय ढंग से मौत हो जाता है। पाक अधिकृत कश्मीर की जमीं देने के बाद भी कश्मीर इनके लिए बिशेष मुदा है जो चुनाव के कुछ महीने पहले गर्म होता है कुछ महीने बाद ठंढा।  पहले कश्मीरी हिन्दुओं को तंग किया जाता है फिर बदले की आग बता वहां के मुस्लिमो को, आखिर कुछ तो हो रहा होगा कश्मीर में जुल्म जिसपे लोग आक्रोशित हैं। अमेरिका के पुन्जीदुत अर्थात मानवाधिकार आयोग के अनुशार वह के लोग की कोई भी जिन्दगी निजी नहीं है। आर्मी के दुआर उनके माँ बहनों की इज्जत लुटी जाती है।बिरोध में गोलियां दागी जाती हैं, और ऐसे मुद्दे के उठाने में कत्त्र्बदी लोगो ने तो महारत ले ली है।।

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