अजर, अमर, अकिंचन, अनवरत, अग्निपथ पे चलते है,
फिर भी न जाने जनमानस हमसे डरते है या जलते है.
असाध्य रोग, दम घुटती सांसे,मृत्यु पटल में पलते है,
फिर भी न जाने जनमानस,हमसे डरते है या जलते है.
है पाले काल के ग्राश में हम,सयम पहचान हमारी है,
क्यूँ भूल गए हो ऐ लोगों, हम तो वही बिहारी है.
होंगे रणबांकुर तुम ने जने, हम भी कायर और चोर नहीं,
जब खरग कुंबर की गरजी थी, उसका भी था कोई तोड़ नहीं.
दो हाथ कभी कर सकते है,पर नहीं चाहते हैं अनहित ,
राष्ट्र एकता,सर्वोपरी है,प्रथम दृष्टी है, राष्ट्र हित.
मर्यादा का अपमान हो गर, लौह भुजा बन जाएगी,
नम्र भाऊ से झुके ये सर, कही कभी तन जायेगी.
गर नमन करे भरत को तो, ये गलती नहीं हमारी है,
क्यों भूल गए हो ऐ लोगों,हम तो वही बिहारी है.
हम है बिहारी ,बोलो क्या,अरे निचे झुक के मत देखो,
महावीर और बुध की धरती पर किचर यु मत फेको.
है न्याय हमारे haथ नहीं, bhagwaan हमारे साथ नहीं,
हम बात जोहते रहते है पर देता है कोई हाथ नहीं
ehnat की रोटी खाते है,न भीख मांगने जाते है,
bhaiya bhaiya कहते है, फिर भी नहीं तुमको भाते है.
कुछ कुत्तों के चक्कर में हम बहर बने क्यों भागते है,
होती है सदा अंधेर यहाँ,हम सुबह क्यों नहीं जागते है.
कुछ भी होमेरे भाई हो,सर नमन समीप तुम्हरे है.
क्यू भूल गए है ऐ लोगों हम तो वही बिहारी है...
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